ऑनलाइन विक्रेता के दस सामान्य मुश्किलें

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Written By Sneha and Translated by Shyam Prakash Jha

नीरा को उसके सालगिरह पर अमेजॉन डॉट कॉम से एक बड़ा पार्सल मिला। ये पार्सल उसकी माँ ने उसे उसकी जानकारी के बगैर भेजा था।  नीरा ने पार्सल खोलते ही पाया की उसकी माँ द्वारा भेजा गया माइक्रोवेव ओवन टूटी हुई अवस्था में था।  ये निश्चित था की ये गलती ऑनलाइन विक्रेता और अमेज़न डॉट कॉम की थी, जिन्होंने शायद माइक्रोवेव ओवन को अच्छे तरीके से पैक नहीं किया था। नीरा ने जब अमेज़न के ग्राहक मदद केंद्र से संपर्क साधा तो उसे कहा गया की ऑनलाइन विक्रेता उससे सीधा संपर्क करेगा। फिर ऑनलाइन विक्रेता ने नीरा से संपर्क किया तो नीरा को पता चला कि उसे उसका माइक्रोवेव ओवन सही अवस्था में मिलने में हफ़्तों का समय लग जायेगा।  मीरा विक्रेता को भी दोष नहीं दे सकती थी क्योंकि उसने उसे बताया की उसे टूटे हुए ओवन का घाटा वहन करना होगा और एक नया ओवन भेजना होगा। अब वह बस इंतज़ार और प्रार्थना कर रही थी कि बिना किसी और विलम्ब के उसे उसका ओवन मिल जाये, इसके अलावा उसके बस कोई चारा नहीं था।  ओवन बदलने की पूरी प्रक्रिया बहुत जटिल थी।  पहले उसे टूटा हुआ ओवन विक्रेता को वापिस भेजना था।  जब विक्रेता उस वापिस किये ओवन को जांच परख लेता फिर वह उसे एक नया ओवन भेजता।  बहरहाल इस पूरी प्रक्रिया में दो महीने तक का समय लगा और जब तक नीरा को नया ओवन मिला, उसकी सालगिरह को बीते हुए दो महीने निकल चुके थे।

फलती फूलती इ कॉमर्स की दुनिया

एक तरफ जहाँ ऑनलाइन की दुनिया में रोज नए नए विक्रेता आ रहे हैं, उनके साथ नानाविध तरह की समस्याएं भी अपना स्थान बना रही है। ऊपर के व्याख्यायित कहानी में वैसे तो नीरा को अपना नया ओवन मिल गया मगर उसे कूरियर और पैकिंग का खर्च वहन करना ही पड़ा। समय की हानि अलग हुयी।  दूसरी तरफ जहाँ विक्रेता ने अमेज़न डॉट कॉम पर अपना सामान बेच  के थोड़ा लाभ कमाया होता, उसे टूटे हुए ओवन की जगह नयी ओवन भेजने में दुगनी रकम खर्च करनी पड़ी । समय की हानि उसे भी हुयी।

ऑनलाइन क्रय विक्रय के अपने फायदे नुकसान दोनों हैं।  और जैसा कि  हमने अपने एक पहले के पोस्ट में बताया है, इस ऑनलाइन की दुनिया में क्रेता बनने से पहले किसी को भी सारे परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन करना ही चाहिए। बहुत सारे छोटे-छोटे विवरण ऐसे हैं जिन सब पर किसी विक्रेता का ध्यान निश्चित रूप से जाना मुश्किल है पर इन छोटी छोटी बातों का असर ऐसा हो सकता है कि विक्रेता को हानि हो और अंततः वह ऑनलाइन सामान बेचना ही बंद कर दे। गलत मूल्य निर्धारण से ले कर गलत उत्पाद सूची, कमजोर वितरण व्यवस्था, पुरानी पड़ी सूची  और कमजोर बैकएण्ड – न जाने कितने तरह की समस्याएं हैं जो विक्रेता और उसके ग्राहकों को प्रभावित करती है और अन्तोगत्वा बाजार की गलत छवि पेश कर सकती है।

विक्रेता के सामने विकल्प : इ कॉमर्स या अपना खुद का सेट अप 

उत्तर प्रदेश के तान्या शाह जो विनयार्ड्स नामक कपडे के ब्रांड की मालिक हैं, कहती  हैं कि किसी भी विक्रेता को ऑनलाइन विक्रय के दौरान पैसे के विनिमय की विधि को ध्यान से स्थापित करना चाहिए और किसी भी संदेह को दूर करते हुए न्यायिक प्रक्रिया के तहत अनुबंध करना चाहिए। तान्या कहती हैं “वैसे तो कई स्थापित वेबसाइट कंपनियों के साथ हमारी बातचीत हुयी है मगर हमने अभी तक ऑनलाइन विक्री नहीं की है। साथ ही ये इ कॉमर्स प्लेटफार्म मुनाफे का हिस्सा बहुत ज्यादा मांगते हैं।  वैसे कई नयी शुरू होने वाली वेबसाइट ने भी हम से संपर्क साधा है मगर नए होने के वजह से उनके ऊपर पूरा भरोसा होना मुश्किल है। ”

तान्या यह भी कहती हैं की यदि विक्रेता अपना खुद का सेट अप करे तो निसन्द्देह उसमे समय तो लगेगा ही। स्थापित वेबसाइट के ऊपर मौजूदा ग्राहकों की संख्या विक्रेता के लिए लाभदायी है लेकिन अगर नियम और शर्त विक्रेता के हिसाब से हो।
मुंबई स्थित शालिनी गिरीश LA Elegante जो की एक जेवर का ब्रांड है की मालिक हैं।  वो कहती हैं कि  एक तरफ इ कॉमर्स की दुनिया उन लोगों के लिए उत्तम जगह है जो कुछ नया करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ कॉर्पोरेट जीवन के रूबरू होते हुए इसका प्रबंधन श्रमसाध्य हो सकता है।
शालिनी के अनुसार एक विक्रेता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है ऐसे ग्राहक की मांग पूरी करना जो क्षतिग्रस्त सामान के लिए अपना दावा पेश करते हैं।  शालिनी कहती हैं ” ऐसे बहुत सारे उदहारण हैं जब ग्राहक को ऐसे सामान मिलते हैं जिसे वो पसंद नहीं करते हैं।  यदि स्टोर की कोई  वापसी नीति नहीं है तो ग्राहक सामान को क्षतिग्रस्त कर के बदलने की मांग करते हैं।  हम इसका पता कर लेते हैं।  जब हमें इस तरह की कोई नयी रिक्वेस्ट मिलती है, हम हमेशा सामान बदलने की बात कहते हैं।  लेकिन ग्राहक मना  कर देता है और बदले में कोई अलग सामान लेने की पेशकश करता है। मैं इसे इस तरह से हैंडल करती हूँ :
१. मेरी वापसी की नीति बहुत साफ़ शब्दों में फेसबुक पर प्रकाशित है।
२. मेरी सारी  कोशिश सामान बदल कर देने की है और हम ऐसे ग्राहक को क्षतिग्रस्त सामान के बदले दूसरा सामान देने की मांग को अनुमति नहीं देते हैं। ”
शालिनी और तान्या अपना उत्पाद फेसबुक पेज के जरिये बेचती हैं।

ऑनलाइन विक्रेता की मुश्किलें
इ कॉमर्स की दुनिया का व्यापार उतार चढाव वाला होता है।  एक तरफ जहाँ ग्राहक को तो “कैश ऑन डेलिवरी” (सामान सुपुर्दगी पर भुगतान) से ले के आसान वापसी की शर्तों वाली कई तरह की सुविधाएँ मिलती है , विक्रेता को सारा नुकसान उठाना पड़ता है।  चाहे वो उत्पाद बेचना हो या वापसी या फिर सामान बदलने की स्थिति। कई बार तो विक्रेता को बिना किसी लाभ के सामान को बेचना पड़ता है या बदलना पड़ता है।

इस पोस्ट में हम ऑनलाइन विक्रेता की दस समस्याओं पर ध्यान देंगे।
१ – कई वेबसाइट पर एकसाथ सामान बेचना : एक विक्रेता को एक से ज्यादा वेबसाइट पर बेचने में विभिन्न तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।  इनवॉइस बनाने से लेकर, उत्पाद सूची बनाने की भिन्न प्रक्रियाएँ। कई वेबसाइट पर बेचने का मतलब एक ही समय पर विक्रेता को कई प्रारूप में इनवॉइस , आर्डर संख्या , एड्रेस लेआउट आदि बनाना पड़ता है।  साथ में प्रतिद्वंदियों से प्रतिस्पर्धा के मद्देनजर मूल्यों पर भी समझौता करना पड़ता है। चूंकि उत्पाद मूल्य अलग जगहों पर अलग हो सकते हैं, बहुत जरूरी होता है कि विक्रेता विभिन्न जगहों पर उत्पाद मूल्यों का ध्यान रखे और उसे बदलते रहे ताकि मूल्यों के प्रतिस्पर्धा में वो पिछड़ न जाये।  समय आ गया है कि उनके इन मुश्किलों के समाधान के लिए कोई ऐसा साधन मिले जिससे वो आसानी से यह काम कर पाये।

२ – क्षतिग्रस्त उत्पाद , रद्द किये गए आदेश , लोजिस्टिक्स से सम्बंधित समस्याएं : दरअसल इ कॉमर्स की नीतियां ज्यादातर ग्राहक के पक्ष में होती हैं, कभी कभी ग्राहक उसका दुरूपयोग भी करते हैं।  जैसे उपयोग किये सामान को क्षतिग्रस्त बता कर थोड़े दिन बाद वापस करना। दुर्भाग्यवश विक्रेता को ऐसे स्थिति में भी इ कॉमर्स वेबसाइट को कमीशन देना ही पड़ता है।  उत्पाद के क्षतिग्रस्त होने के बदले मूल्य मिलने की बजाय विक्रेता को वापसी का भी खर्च वहन करना पड़ता है।  यदि वापस किया हुआ सामान ठीक से पैक नहीं हो या क्षतिग्रस्त हो तो उसे फिर से बेचना असंभव होता है।

३ – स्प्रेडशीट की मदद से मैनुअल इन्वेंटरी : विक्रेता के लिए एक से ज्यादा चैनल्स के माध्यम से बेचने के लिए एक ऐसी इन्वेंटरी का होना जरुरी होता है जिसका उसके व्यापर के साथ पूरा तारतम्य हो।  ये वास्तविकता है कि बहुत सारे विक्रेता अभी भी इन्वेंटरी प्रबंधन के लिए पुराने तरीको जैसे स्प्रेडशीट का इस्तेमाल करते है जबकि तकनीकी प्रगति के साथ आजकल क्लाउड कंप्यूटिंग और एप्प्स कंट्रोल के समय में पुराने तरीको का इस्तेमाल श्रमसाध्य होता है।

४- आर्डर की संख्या : एक बड़ी समस्या जो विक्रेता के सामने मुंह बाये कड़ी होती है, वह है ग्राहकों को उत्पाद भेजने की संख्या। अगर ग्राहक और आर्डर की संख्या कम हुई तो प्रति उत्पाद भेजने का खर्च ज्यादा हो जाता है।  बहुत सारे विक्रेताओं जिनका कूरियर कम्पनिओं के साथ उत्पाद भेजने का समझौता होता है , उनके उत्पाद यदा-कदा देरी से भेजे जाते हैं अगर उत्पाद भेजने का आर्डर कम होता है।

५ – भुगतान और कर : ज्यादातर इ कॉमर्स साइट के भुगतान की अवधि ८ से ३० दिनों के बीच होती है। साथ में अलग अलग तरह के इनवॉइस फॉर्मेट के चलते टैक्स रिटर्न्स की समस्या अलग खड़ी हो जाती है।उसके अलावा इ कॉमर्स के जरिये व्यापर से सम्बंधित किसी मानक नियम की अनुपस्थिति या उसकी सही व्याख्यान न होने से मुसीबत और बढ़ जाती है।

६ – लाभ का अंतर : इ कॉमर्स साइट्स के ऊपर विक्रेताओं की बढती संख्या प्रतिस्पर्धा बढाती है और विक्रेता के रूप में आपके उत्पाद और उसके मूल्य को प्रभावित करती है। प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा होती है कि हरेक क्षण एक विक्रेता दूसरे विक्रेता से सस्ता अपना उत्पाद बेचने की कोशिश में रहता है।

७ – सामान सुपुर्दगी के वक़्त भुगतान का कष्ट : इस विधि के अंतर्गत, ग्राहक भुगतान सामान सुपुर्दगी के वक़्त ही करता है।  इस तरह से ग्राहक पूरी तरह के कूरियर वाले बन्दे के ऊपर रकम के लिए आश्रित हो जाता है।  इसके साथ ही पैसे विक्रेता तक पहुँचने में १५ से २० दिन तक का समय लग जाता है।

८ – कुख्यात खरीदार : ऐसे कई किस्से हैं जहाँ कुछ खरीदार सामान सुपुर्दगी के बाद भी भुगतान करने को तैयार नहीं होते हैं।  कभी कभी तो डिलीवरी वाले बन्दे के साथ मार पीट भी कर डालते हैं।  ऐसे ग्राहक को सम्भालना और पैक करने से ले कर लॉजिस्टिक की पूरी विधि अपने आप में एक जटिल समस्या है।

९ – नकली और गलत समीक्षा : किसी विक्रेता की छवि को बिगाड़ने के उद्देश्य से कभी कभी दूसरे विक्रेता छद्म ग्राहक बन कर विक्रेता के उत्पाद की गलत समीक्षा लिखते हैं।  वैसे तो ज्यादातर इ कॉमर्स साइट ने ऐसे नकली ग्राहकों को पहचान कर त्वरित कार्यवाही करने का तरीका अपनाया है मगर एक सच्चे विक्रेता के लिए गलत समीक्षा से निबटना एक कटु अनुभव होता है।

१० – ख़राब छायाचित्र : किसी भी विक्रेता के लिए ग्राहक को आकृष्ट करने के कई तरीके सीखना जरुरी होता है।  किसी भी उत्पाद का ख़राब छायाचित्र उसके बिकने की सम्भावना को कम कर देता है।  किसी पेशेवर छाया चित्रकार के मदद से ली गयी तस्वीर उत्पाद और उसके विक्रेता की सकारात्मक छवि बनता है।

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